"ज़िन्दगी में"

सीखा के प्यार, दूसरे के बाहों में चली गई।
ये इश्क़ नहीं हुनर था, जीते-जी मार गई।
कल एक झलक देखा उसकी तस्वीरों कि,
वो मोहब्बत में मेरी गुनगुना रही थी।
फिर बहुत ढूंढा इधर उधर उसको,
ना जाने वो अब किसके साथ मुस्कुरा रही थी।
हम दोनों क्यों खफा हुए एक दूसरे से वो बखूबी जानती थी,
उसको प्यार इतना था कि वो हर दिन नए तरीके से मारती थी।
मैंने पूछ लिया— इतना दर्द क्यों दिया कमबख्त तूने,
क्या कोई और आ गया ज़िन्दगी में?
वो हंस कर बोली— तू था ही कब मेरी ज़िन्दगी में!!


                                        By— Pradeep Yadav

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