वो दिन
आज मैं वो गुजारा हुआ कल याद करता हूं,
मैं अब अपने बचपच के पल ढूंढता हूं।
वो दिन भी कितने खास हैं,कुछ वक्त बताएं अपनों के साथ और दोस्तों के राज छुपाए हजार थे।
वो पल भी दिल के कितने पास है,
दोस्ती इतनी प्यारी थी रह ना पाए मिले बगैर,
वो दिन भी कितने कमाल थे।
हम सारे जो दोस्त साथ थे, एक मिसाल थे,
जो चोट लग जाए किसी को तो डॉक्टर बन उपाय बताते अनेक थे।
खेलने निकले सुबह को और आते डांट खा के थे,
वो दिन भी कितने कमाल थे।
माशुमियत से भरे अल्फ़ाज़ है,
हम भी अपनों के खास है।
बैठने को बस यार चार थे,
घर से दूर हम अपनी मस्ती में फरार थे।
वो दिन भी कितने खास थे,
हम सारे यार साथ थे।
By— Pradeep Yadav
Comments
Post a Comment