यादों में रह जाऊंगा

मैं रहूं या ना रहूं,
मेरा पता रह जाएगा।
आंखों में यदि आंसू आ जाए तो,
मेरा इश्क पूरा हो जाएगा।
बो रहा हूं यादों को यहां,
खुशबुओं का इक अनोखा सिलसिला रह जाएगा।
अपने को मुझसे दूर रख ये पेड़ हमेशा हारा न रह पाएगा।
वृक्ष को काटा है जड़ से,
अब ये दोबारा न उग पाएगा।
मैं भी छांव हूं मगर धूप मेरी मंजिल नहीं,
मैं भी धूप हो गया तो मेरा क्या रह जाएगा।
मैं भी बिखर जाऊंगा धूल की तरह,
लोग उड़ा देंगे गंदगी समझ के।
अब मैं रहूं या ना रहूं,
मैं खुद का न रह गया अब तेरा क्या हो पाऊंगा।


                             By— Pradeep Yadav

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