नाराजगी

उसे कोई समझाओ,
हमें लड़े एक रात हो गई है,।
इश्क में नाराजगी की,
कौन सी बात हो गई है।
बिछड़ के तुझसे खुश ना रह पाऊंगा,
अब ये भी बोलने की क्या बात रह गई है।
मैं अमिट कदम चल चुका हूं घर से दूर,
क्या इतनी बड़ी बात हो गई है।
जरा मुड़ कर देखो उदासी चेहरे की,
यह कविता लिखते हुए अब तो एक नई सुबह हो गई है।

                By— Pradeep Yadav

Comments

Popular Posts