मासूम चेहरा
ना नींद और ना ख्वाब से आंखें में भरना है,
मोहब्बत में एक बार फिर से आहे भरना है।
किसी की खोज नहीं है मुझे,
जिससे मोहब्बत निभानी है उसने फिर से कसम दिलाई है।
वो जुल्फें किसी और की नहीं जो मुझे सवारनी है,
अकेले मै कैसे खुश हो लेता मुझे औरो की भी जो निभानी है।
तमन्नाओं से कैसे दूर हो जाऊं,
चांदनी रात में खुद से जो बातें करनी है।
मेरे चाय का जायका जरा अलग है,
एक धुआ नशे का माहौल बना देता है।
तेरे मासूम चेहरे से,
मैं अपने इरादे ना बदल बैठूं,
कि जिस चीज का मुरीद था,
आज उसी से नफरत कर बैठा हूं।
By— Pradeep Yadav
Comments
Post a Comment