डर

एक डर है खोने का,
मैं अब ख्वाब देखता नहीं।
अंधेरे में खो गया,
उसके बाद का याद नहीं।
मिला था तो गले लगे हैं,
जा रहा तो पूछा नहीं।
तेरा साथ था तो सपने सजे,
दूर हुए तो उम्र ना कटे।
मैं हूं खुद से बेखबर,
मेरा कोई पता ना पूछे।
ये इश्क कितना अजीब है,
ना जीने दे ना मरने दे।


        By— Pradeep Yadav

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