बेटे को भी बचा लो यार!!
मैं भी लेता हूं सांस,
कांटा नहीं हूं इंसान।
गुणों से भरा खान नहीं हूं,
बाप से लड़ जाऊं,
शायद अच्छा इंसान नहीं हूं।
जज्बात है मेरे भी,
मां-बाप की गुड़िया नहीं पर मानो बेटा तो सही।
मैं बोझ नहीं,
मेरा भी भविष्य है।
बेटी ईश्वर की सौगात है,
बेटी पारस है, बेटी अंश है,
बेटी शान है, बेटी मान है,
बेटी गुमान है।
बेटी संस्कृति है, बेटी दुआ है,
जब आई बेटे की बारी,
तो बेटे पे निकला सिर्फ गुस्सा है।
लोग बच्चे को कहते है तू मर्द है,
बेटी की बारी आती है तो उसका कला होना भी एक डर है।
दिल पूछता है मुझेसे मेरा,
की मेरा क्या कसूर है।
जो बीती मुझपे,
बस वो ना हो फिर से सोच के लिखा कुछ एक बार फिर है।
मैंने तो अपना वजूद याद दिलाया,
जो सबको नहीं है शायद मंजूर।
यूं तुम भूल मत जाना मुझको,
कभी आंखों से प्यार कर देना।
इस बेटी बचाओ, बेटी पढ़ा़ाओ में,
कहीं तुम बेटे को न खो देना।
काट ना देना तुम मेरे हिस्से का प्यार,
बेटी है अगर होनहार तो बेटे का भी देना तुम साथ।
By— Pradeep Yadav
Comments
Post a Comment