आए कुछ🌸
आए कुछ उसका चेहरा आए,
आए कुछ वो आए,
कुछ तारीफे हम लाए,
कुछ नशा उसके होने से आए।
दुपट्टा जब चेहरे से हटाए,
चांद का होना भी फिजूल हो जाए,
कुछ हम शर्माए,
तो कभी चांद छुप जाए,
इस तरह कुछ सुबह हो जाए।
आए कुछ अल्फ़ाज़ आए,
आए कुछ नई किताबें आए,
कुछ कविताएं आधी-अधूरी हैं,
कुछ कविताएं पूरी करनी है।
अपनों के कर्ज चुकाने हैं,
कुछ यार रुठे है,
तो कुछ फ़र्ज़ निभाने है,
कुछ अपनों के लिए बचाना है,
तो कुछ सपनों के लिए सजाना है।
By— Pradeep Yadav
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