फर्क
पराए के आगे हाथ नहीं फैलाऊंगा,
भीग जाऊंगा पर रोटी खुद की मेहनत की खाऊंगा।
अगर अल्लाह ने बनाने की हिम्मत दी तो,
खुद को और काबिल बनाऊंगा,
कैदी नहीं बनाऊंगा।
मैं जिंदगी में कुछ बन जाऊं तो,
प्यार लोगों का नहीं भूल पाऊंगा,
दर्द कुछ नए लाऊंगा।
मैं एक अपनी दुनिया बनाऊंगा,
काबिलियत और जुगाड़ में इन्हें फर्क समझाऊंगा।
By— Pradeep Yadav
Comments
Post a Comment