जैसा है~

ब्रह्मांड ये वृक्ष के कठोर हिस्से जैसा है,
यहां सुख शांति तपस्या करने जैसा है।

पत्तों का धीरे-धीरे गिर कर मर जाना,
भूख को मिटा कर सोना चखने जैसा है।

इस पूरी प्रतिक्रिया में कोई शोर नहीं है,
ये तिरोहित हो सिंकना अवयव जैसा है।

ज़िंदगी से झूठ का अलग होना जैसे,
सब कुछ दान कर के जीने जैसा है।

प्रेम करना भी अनैतिक कार्य जैसा है,
जैसे पेड़ लगाना भी व्यापार जैसा है।


                               By~ Pradeep Yadav


ब्रह्मांड;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
संपूर्ण विश्व; विश्वगोलक।

प्रणय;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
प्रेम; प्यार; अनुराग।

तिरोहित;
संस्कृत ; विशेषण
अदृश्य; लुप्त; अंतर्हित, ओझल,ढका हुआ या छिपा हुआ।

सिंकना;
अकर्मक क्रिया
आँच पर गरम होना या पकना । सेंका जाना । जैसे, — रोटी सिँकना ।

अवयव;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
अंश; हिस्सा; भाग; अंग।
अभिन्न अंग, शरीर का अंग।

अनैतिक;
संस्कृत ; विशेषण
जो नीति के विरुद्ध हो; जो नैतिक न हो।
अनुचित; अवांछित।
सदाचार के विरुद्ध (इमॉरल)।

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