देखो ~

सबके अंदर ये जो आग धधक रही है वो तो देखो
उनके आने से जो आती है मुस्कान चेहरे पे
लोगो को लगने दो तुम आशुओं को बहा कर तो देखो

देर जागने से जो ज़ुल्फ़-ए-सियह है वो तो देखो
उसके जाने से जाना अगर अंधेरा है तो
कभी जिगर से होने वाली अगली सुबह को तो देखो

हसीं इश्क़ का आग़ाज़ कर रहे उस आजिज़ को तो देखो
बिजली है राहों में संभल के चल रहे नंगे पाव
सब समझते है की नादान का हाल बुरा है फिर भी आजमा कर तो देखो

हाथ जोड़े खड़ा है माफ़ी के खातिर उस मसरूर को तो देखो
उनके मन में कोई और ही तड़प किसी के लिए
झलकता है अहंकार तो जरा पीछे कदम बढ़ा कर तो देखो

दिल की चोट बहुत दर्द देती है चोटिल होकर तो देखो
सबके दरवाजे पे पत्थर मार के देखते होंगे
वो अगर सादगी तो मैं खुला रहूंगा नाज़ से मार कर तो देखो



                                          By~ Pradeep Yadav



zulf-e-siyah
ज़ुल्फ़-ए-सियहزلف سیہ
black tresses

aajiz
आजिज़عاجز
helpless, humble, dejected, frustrated
असहाय, बेसहारा, लाचार, परेशान
निराश्रय, असहाय, बेबस, लाचार, ऊबा हुआ, परीशान, विनम्र, खाकसार।

masruur
मसरूरمسرور
glad, happy, cheerful, delighted
आनंदित

naaz
नाज़ناز
pride, grace
गर्व, सौन्दर्य, हाव-भाव, अभिमान
हाव-भाव, नाज़ोअदा, मान, अभिमान, घमंड गर्व, फ़ख़ ।।

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