नया भारत कुछ ऐसा देखा~

मैंने सहर में कल एक घर को जरा गौर से देखा,
आज़ादी से अलग असली नकली तेवर को देखा।

धवल तिरंगे में भी सबने सिर्फ भगवे को ही देखा,
हरे से हिंदू-मुस्लिम को धूल में गिरते मिलते देखा।

तुहिन में कभी सूरज की किरणों को गिरते देखा,
हिमालया के कंधों पे बादलों के आगे घिरते देखा।

बघारते है कुव्वत यहां सारे मैंने ऐसा भारत देखा,
भाषाओं की माया में झंझानिल जैसे लड़ते देखा।

मैंने सहर में कल निराधार बात पे गरजते देखा,
आज़ादी से अलग शाइरी में केवल मिलते देखा।


                                           By~ Pradeep Yadav



अमल;
संस्कृत ; विशेषण
कार्य रूप में होना; प्रयोग; व्यवहार।
कार्य, आचरण।

धवल;
संस्कृत ; विशेषण
उजला; सफ़ेद
निर्मल; स्वच्छ; धुला हुआ
रुपहला; सुंदर।

तुहिन;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
हिम; तुषार, ओस कण
ज्योत्स्ना; चाँदनी शीत; ठंडक।

सरोकार;
संज्ञा पुल्लिंग
वास्ता; संबंध
परस्पर व्यवहार का संबंध; लगाव
मतलब; प्रयोजन।

बघारते;
told tall tales, fantasized,

कुव्वत;
संज्ञा स्त्रीलिंग
शक्ति; बल; ताकत; सामर्थ्य; क़ुव्वत।

माया;
संस्कृत ; संज्ञा स्त्रीलिंग
दौलत,भ्रम,इंद्रजाल; जादू

झंझानिल;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
वह तेज़ आँधी जिसके साथ बारिश भी हो; झंझावात; तूफ़ान।

निराधार;
संस्कृत ; विशेषण
जिसका कोई आधार या आश्रय न हो (व्यक्ति)
जिसकी कोई जड़ या बुनियाद न हो; निर्मूल (बात, आरोप)
जिसे अभी तक कोई सहारा न मिला हो; असहाय (व्यक्ति)।

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