याद आती है~
मुझे याद आती है उसकी रूह की,
मुझे याद आती है उसके स्पर्श की,
मुझे याद आती है उसकी मुस्कान,
मुझे याद है आज भी उसकी पहचान।
मेरे दिल के सबसे करीब थी वो,
दूर है मगर कभी सबसे करीब थी वो,
जुड़ी हुई है आत्मा जैसे मरीज़ है वो,
मैं इलाज़ था उसका मेरे करीब है वो।
मुझे याद आती है उसकी बातें सारी,
जैसे जुड़ी हो हमारी कहीं से कई सी तारें,
जाने से क्या हुआ उसके मैं अमीर हूं फिर भी,
दूर है वो लेकिन दिल के करीब से नहीं मेरे।
मुझे याद आती है उसकी हर छोटी बात,
कुछ बचकानी तो कुछ सयानी रात,
मुझे याद है वो सारी उसकी बताई हुई बात,
जुदा होना तै था मगर वो बता के गई जीने के राज।
मुझे याद आती है उसकी सादगी,
मुझे याद आती है उससे हुई दिल लगी,
मैं महसूस कर रहा उसकी बात जो,
मेरे दिल पर जा कर लगी थी कभी।
मुझे याद है उसका रोना,
मुझे याद है उसकी नौटंकी,
मुझे याद है उसको मनाना,
मुझे याद है कैसे प्यार करना।
मुझे याद है उसका आखिरी चेहरा,
मुझे याद है उसकी आखिरी मुस्कान,
मुझे याद है उसका आख़िरी रूठना,
मुझे याद है उसका सच में रोने वाला मुखड़ा।
मुझे याद है उससे जुड़ी सारी बातें,
मुझे बतानी है ये बात इस पैग़ाम के सहारे,
मुझे याद आती हो बहुत अगर ना लौट सको तो,
कुछ करो और बुला लो मुझे भी किसी के हवाले।
मेरी याद में हो तुम हर सांस में तो तुम,
मेरी रातें तुम्हारे होने पर निर्भर है,
प्यार हो मेरा कैसे जाने दे दूर तुम्हें,
पास बड़ा कम रहे अब दूर कैसे जाने दे तुम्हें।
मुझे याद है गाल को छू लेने देना,
मुझे याद है अपने सारे हक,
हां, मुझे वो सारे एक दिन दे देना,
मैं इंतज़ार कर रहा मिलने का।
मेरा कम से कम साथ आने का इतंजार कर लेना,
मुझे याद है हर वो पल जिसमे तुम रुकती थी,
मेरे लिए सबसे लड़ती थी मुझसे प्यार करती थी,
मेरे से दूर हो और देखो दूर हो कर भी करीब हो।
मुझे याद है सब मुझे याद हो तुम,
मुझे याद है दूरी मुझे याद है गम,
मुझे याद है वो पुराने दिन कुछ हसीं पल,
मुझे याद है सब और भूल गया हूं बुरा कल।
लौट आना या बुला लेना मुझे यहां से,
मेरा जी नहीं लगता है जरा भी खुद में,
कितना झूठ बोल रहा हूं और कबसे,
मुझे याद है वो पल ले चलो मुझे कल में।
By~ Pradeep Yadav
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