यहां झूठे शायरों की महफ़ल सजी है,
गुस्ताखी माफ़ मौहोल में नरमी जो बढ़ी है,
मेरे शब्द कहते रहे दर्द में खुशी को अपना,
तुमने चुना था मुझे और देख के या सपना।

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