सफर

एतबार हमको भी था,
मगर एतराज तुमको ही था।
शायद वक्त खराब मेरा था,
वरना ये फासला निभाना किसको था।
एक सफर किया है खुद की तलाश में,
नाकाम हो चुका है जीवन इन खोखली आस में।
वक्त को गुजरना है अपने ही अंदाज में,
क्यों फिर रहूं मै तेरे इंतजार में।
मत पूछना इंसान कैसा हूं,
आज-कल सच्चाई इंसानियत से परे है।
तू मोहब्बत में अब कोई चाल तो चल,
अब भी हार जाने का जिगरा है मुझ में।


                              By— Pradeep Yadav

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