आशिक़ी


कल फिर किसी ने दर्द दे दिया, मुझसे तेरा हाल पूछ लिया।
आशिकी का आलम भी कुछ इस कदर हो चुका है,
कि तेरा देर से ऑनलाइन आना भी सजा बन चुका है।
बहुत होंगे तुम्हें चाहने वाले और तुम्हें गुरूर आ गया,
तुम पहचान ना सकी, कौन है तुम पे मर मिटने वाले।
तेरी अदाओं पे मरते हैं तो लिखते हैं,
वरना काम तो हम भी करते हैं।
तेरे जिंदगी का हर रंग मंजूर है, बस वो तेरे संग हो।
बदलने दो दुनिया को जितना बदलना चाहती है,
कितने चेहरे देखे हमने... कितने और दिखाना चाहती है।
वक़्त बदलेगा और लोग भी बदल जायेंगे एक दिन,
हम फिर भी वही होंगे ये उन्हें कौन समझाएगा?
जिंदा हूं मोहब्बत के लिए...
आज नहीं तो कल, खुदा मेरे रूबरू होगा।
राहों का ख्याल है मुझे, मंजिल का हिसाब नहीं रखता।
अल्फाज दिल से निकलते हैं, मै कोई किताब नहीं रखता।


                                          by— Pradeep Yadav

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