सुकून

ये बेचैन सा दिल बेहलाने क्या लगा,
खुशी मिली नहीं तो दुख को अपना दोस्त बनाने लगा।
अरे, सुकून ढूंढता रहा उम्र भर...
आखिर में पता चला,
बचपन था तो सुकून था।


                      By— Pradeep Yadav

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