रावण

मार दो बेशक मुझे, मैं रावण हूं इस लंका का।
पर राम कौन है यहां??
हल करो मेरी इस शंका का।
अरे पराई स्त्री को घर में रखकर सम्मान करना कोई रावण से सीखे,
वरना लोगों ने तो दूध पीती बच्ची को भी नहीं छोड़ा।
जमाना कल भी खराब था और आज भी खराब है...
आज लोग द्रौपदी का चीरहरण करने वाले को भूल गए,
जिसने सीता को हाथ भी नहीं लगाया...
वो आज तक जल रहा है।
रावण का पुतला जलता तो हर बार है,
आता तो राखी का त्यौहार भी है।
कलाई भर-भर के राखी सजाए दिखते तो भाई हजार हैं,
पर छुप-चुकी चकाचौंध से दूर फिर क्यों हो रहा अब भी बलात्कार है।
मैं तो तैयार बैठा था, की कब कोई रावण आ जाए,
पर आज के इन रामों ने रावण को मौका ही नहीं दिया।


                                           By— Pradeep Yadav

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