बचपच

बचपन में जो अकेलापन खलता था,
आज वही अकेलापन सकून देता है।
जो कुछ भी है सब खो चुका हूं,
सबका भला करके आज मैं खुद बुरा बन चुका हूं।


                                   By— Pradeep Yadav

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