नींद चाहता हूं

दूर जाते हुए एक बात बोलना चाहता हूं,
प्यार उससे बहुत करता था...
एक बार फिर से मिलना चाहता हूं।
अंधेरी रातों को दिल जलाकर बिताया था,
अभी पूरा जला नहीं हूं...
इसलिए फिर से तेरे साथ चलना चाहता हूं।
जिंदगी में कुछ खास नहीं अब जीने की कोई आस नहीं,
बिछड़ गए सब लोग...
आज कोई मेरे साथ नहीं।
आखरी बार कब हँसा था कुछ याद नहीं,
अब रोने से क्या होगा...
जब कोई चुप कराने वाला पास नहीं।
ख्वाब था वो हसीन जिसमें वो आया करती थी,
अब तो नींद से भी डर लगता है।
अब मैं तुम्हें खोना चाहता हूं, 
आज आराम से सोना चाहता हूं।


                                     By— Pradeep Yadav

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