फासले

अपनी मोहब्बत से वादा कुछ इस कदर निभाना पड़ गया,
खुलकर रोना चाहा मगर मुस्कुराना पड़ गया।

मुझे फासलों की कोई फिक्र नहीं थी,
मैं तो रूह से ताल्लुक रखता हूं,...
अगर जिस्म की भूख होती तो घर का पता जरूर पूछता।


                                      By— Pradeep Yadav

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