पैगाम✍️
मौत चाहता था, मिली नहीं।
तुमसे दूर होना था, हुआ नहीं।
चाहत थी बदल गई,
तुम्हारी आदत थी छूट गई।
प्यार का नशा था उतर गया,
कोई और ही नशा चढ़ गया।
ना मैं तेरा हुआ ना तू मेरी हुई,
दौर के साथ सब बदल गए हैं।
प्यार के वादे जिसने किए,
आज वही हमें मरने को केह गए।
मुझसे ये हादसा गुजर गया,
जो मेरा हमदर्द था वही आज दर्द दे गया।
अब अपनी दिक्कतें तुम्हें क्या बताएं,
समंदर होकर भी हम खारा पानी कहलाए।
गहरी काली रातों में पैगाम लिखा है,
मैंने आज अपने जुनून का अंजाम लिखा है।
समंदर जितना प्यार किया था,
तुम्हारी नफरत तो नाप भी ना पाया।
तड़पती आंखों में एक ख्वाब होना चाहिए,
तुमसे मेरा सामना हर शाम होना चाहिए।
by— Pradeep Yadav
Bahut sundar❣️
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