दूरियां
खुदा मानता था...
मोहब्बत का पाप क्या हो गया,
मोहब्बत से तो नफरत हो गई....
लेकिन अब तुम्हे भी याद नहीं रखना चाहता।
दारू भी कमाल की होती है...
पीते ही उसकी बेवफाई,
होश आते ही उसकी फिक्र।
हे, भूल जाने का मशवरा देने वालों,
कुछ ऐसा करो की मैं खुद को भूल जाऊं।
By— Pradeep Yadav
Nicely penned 👌🔥
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