जख्म २

कम लफ्जों में बहुत कुछ बोल जाता हूं,
दर्द हूं ना... बहुत जल्दी समझ आता हूं।
धोखे भी खाए, जख्म भी सहे,
और तो और अपने नजरों में भी गिर गया आज,
तुमने क्या सोचा मैं बस यूं ही शायर बन गया।
दिल अब भी ना भरा हो,
तो आजा देख मैं तेरे शहर आया हूं,
तू बस नमक लेती आना मैं जख्म अपने साथ लाया हूं।
बिछड़ कर मुझसे तुझे, खुश होना अच्छा लगता है,
जा खुश रेह, मुझे तेरा खुश रेहना अच्छा लगता है।
भूल जाऊंगा तुम्हें, थोड़ा टाइम तो दो,
यहां बहुत से चेहरे हैं दिल लगाने को,
एक बार फिर से नशा तो चढ़ने दो।
तुझे रोकना चाहता हूं, पर रुकूंगा नहीं,
क्योंकि वो आने वाला दर्द अभी के दर्द से बहुत कम है।


                                             By— Pradeep Yadav

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