कश्ती की बाहों में था, जाने कब बह गया,
बारिश से मेरा साथ था, जाने कब टूट गया,
इश्क़ मेरा मुकमल था, वो भी अब छूट गया,
मैं मुड़-मुड़ के देखता था, हर कोई रुठ गया।


Comments

Popular Posts