कुछ यूं थी मेरी कहानी!

दोबारा कैसे लुट जाऊं??उसी बाज़ार में!!
जहां खाया है धोखा मैंने किसी के ऐतबार में।
प्यार को हवस बता कर तूने किनारा पकड़ लिया...
जो इन दो शब्दों में अंतर ना जाने उसको ये किन चक्करो में पड़वा दिया???
ना ये जमीन अब अपनी लगती है,
और ना ही आसमान में सकून दिखता है।
किसको अपना कहूं!!
मेरी दुनिया तो वहीं थी।
प्यार नहीं है बोल के...साथ रहकर साथ होने का ऐहसास
दिलाया... तुमने तो बड़ा सही फायदा उठाया।
क्या गजब तरीके से तुमने मेरा प्यार का मजाक उड़ाया...
अरे तुमने तो अपना असल मतलब निकाला।
यह मत सोचो कि तुम छोड़ दोगी तो हम मर जाएंगे...
वो भी जी रहे हैं जिनको तेरे लिए हमने छोड़ा था।
इतना तो सीखा है अपनी जिंदगी से...
जो धोखा खाकर संभल जाए वो प्यार नहीं करते...
अगर किसी से मोहब्बत हो भी गई तो कभी इज़हार नहीं करते।
धोखा मिलेगा यह तो पता था...
लेकिन वो तुमसे ही मिलेगा ये ना सोचा था!!
जान ही दे देता तो फायदे में रेहता...
यह दिल का सौदा तो...यार बड़ा महंगा पड़ा।

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