औकात

शब्द ही काफी है तुझे तेरी औकात बताने को,
तू सोच भी मत मुझे नीचा गिराने को।
शब्द से ही मारूंगा...
हाथ झेल ले ये तेरी औकात नहीं,...
मुझे घुटने पर बैठा दें ऐसी तुझ में कोई बात नहीं,
तेरा मैं आशिक बना फिरू ऐसा मै झांट नहीं।
तू तो जिद थी मेरी,
वरना मोहब्बत तो कभी का दम तोड़ चुकी थी।
कहने को तो बहुत कुछ था,
लेकिन अब शब्द कम पड़ गए हैं।
झूठ कहूं तो शब्द का दम घुटता है,
सच कहूं तो लोग नाराज हो जाते हैं।
दम जुबान में नहीं, जिगर में रखो।
बात सिर्फ भोकने की होती, तो आज हर कुत्ता भी,...
हाजी मस्तान होता।


                                   By— Pradeep Yadav

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