मौत

चाहने से तो मौत भी ना मिली,
और भला अब क्या चाहूं।

क्या बताऊं तुम्हें कैसे हालातों से गुजर गया,
हमदर्द क्या बना अपनी जिंदगी में कई मौत मर गया।

जिंदगी तो बेवफा है, एक दिन ठुकराएगी,
मौत महबूबा है, एक दिन साथ ले जाएगी।


                               By— Pradeep Yadav

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