आतंकवाद
वो सिंदूर मिट गया,
वो कोख उजड़ गई,
उसके खिलौने महंगे हो गए,
उनकी लाठी छीन ली,
सरहद का वो भाग अनाथ हो गया,
जब वो जबाज तिरंगे में लिपट गया।
बस एक फोन ऐसी खबर क्या लाई,
पूरा घर बिखर सा गया।
कुछ चंद रुपयों के लिए,
हैवानों वाला काम करते हैं।
और फिर बेफिक्र होकर,
हजारों जाने लेते हैं।
जो हमले हुए, क्या हम उसे भुला सकते हैं?
रोते हुए उस परिवार को, क्या हम हंसा सकते हैं?
मैं सीधा मुद्दे पर आता हूं,
बातें छोड़ मै सीधा हथियार उठाता हूं।
मार के जवानों को छुप लोगे तुम?
आओ ये बात गलत साबित करके दिखाता हूं।
कायरता से नहीं, वार होता कैसे है सामने से,
आओ मै सिखाता हूं।
कितनी गलतियां तुम्हारी माफ करेंगे?
अब सुनो बाद में ये सारी बात करेंगे।
क्योंकि पहले जो तुमने कीचड़ उछाला है,
तुम्हारे ही खून से इसे हम साफ करेंगे।
दुख तो इस बात का है आतंकवादियों,
तुम्हारी वजह से कुछ मासूम भी मरेंगे।
तुम्हारी वजह से आज वो रोए हैं,
जिन्होंने आज अपने खोए हैं।
By— Pradeep Yadav
Msst likha hai🔥
ReplyDeleteNicely penned 👌👏🔥
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