khushi

आज फिर अपना दिल दुखाऊंगा,
बेवजह ही अपना प्यार जताऊंगा।
जानता हूं मै तू पड़ेगी नहीं,
फिर भी मैं तुम्हें लिखता जाऊंगा।
वो दौर भी फिर से शुरू हो गया,
मैं किसी के ख्यालों में खोने लगा...
और नींद मुझसे खफा हो गई।
नींद की गोलियां लेकर...
यादों को तो नजर अंदाज कर दिया,
पर आज तक उन यादों को मिटा ना सका।
प्यार है कहते-कहते ज़माना निकाल दिया,
पर तुमने इसे नजरअंदाज करते हुए...
मुझसे खुद को दूर कर लिया।
करती है याद आज भी मुझे,
पर बोलती है खुश हूं मैं।
चाहती है ढूंढना अपनी खुशियों को,
मुझसे जुदा होकर।
रो-रो कर बोलती है, रिश्ता तुमने तोड़ा।
अब वो खुशी का पता पूछती है मुझसे।


                                  By— Pradeep Yadav

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