खत्म।
मुझे क्या!
तुम्हें क्या!
हमें क्या!
और रिश्ते धीरे-धीरे खत्म क्या!!!
कभी अच्छा हूं, कभी बुरा हूं,
इंसान हूं, खुदा थोड़ी ही हूं।
करीब रहकर भी...
तुम मेरा हाल ना समझी..,
दूरियां तुम्हें बताएंगी,
मेरी मोहब्बत क्या थी।
सूरत से इश्क करने वाली इस दुनिया में...
मैंने बिन देखे तुझे प्यार किया था...
कुछ तो कदर करती मेरी मोहब्बत का...
मैंने तो तुझ पर जान भी वार दिया था।
अरे नशा तक छोड़ा था तुझे पाने के लिए,...
नशा ही काम आया तुझे भुलाने के लिए।
तकलीफ ये नहीं है की मोहब्बत थी,
तकलीफ ये है कि अब तक वो भुलाई नहीं जा रही।
वो जान गई थी मुझे दर्द में मुस्कुराने की आदत है,
वो रोज नया दर्द देती थी मेरी खुशी के लिए।
छोटी सी जिंदगी ने बड़ा सबक सिखाया है,
रिश्ता सबसे रखो, उम्मीद किसी से ना।
अब नफरत है मुझे खुद से पर..,
अब मोहब्बत तुमसे भी नहीं।
मेले बाबू, मेरे सोना
मेरे बगैर,
खुश तो हो ना....?
कहां तलाश करोगे तुम मेरे जैसा इंसान!!
जो तुमसे जुदा भी रहे और मोहब्बत भी करें।
तुम लौट कर आने की
तकलीफ मत करना,
मै एक ही मोहब्बत दो बार नहीं कर सकता।
मेरा इश्क ना मिलेगा तुझे,
यह सजा क्या काफी है
तेरे लिए...???
By— Pradeep Yadav
Mst💓💓
ReplyDeleteShukriya mere bhaiii✨
DeleteMarvelous...just mind blowing 👏
ReplyDeleteTysm💟💟✨🙏
DeleteUmdaa��
ReplyDeleteThank you dear ♥️
Delete