भारतीय जवान
ना रोया था, ना चीखा था,
वो जब लहू में अपनी भीगा था।
खाकर गोली भी वो तना रहा,
झुकना उसने कहां सीखा था।
थोड़ा तो डरा वो भी, जब मौत उसके सामने आई,
फिर मुस्कुराया भी ये सोच के,
उसकी जान भारत माता के काम आई।
वो लाल था हमारी इस मिट्टी का,
मां के आंचल पर वो बिखर गया।
मरते तो सभी हैं, इस जहान में,
लेकिन वो नसीब वाले वीर जवान ही तो होते हैं,
जिनका कफन तिरंगे का होता है।
पैसों में किसकी दिलचस्पी थी?
वो तो भगत सिंह का दीवाना था।
कहने को तो अमर हैं, पर ये कैसी डगर है?
जो हुए कभी देश के लिए कुर्बान,
उनके पास ही नहीं है...
रोटी, कपड़ा और मकान।
By— Pradeep Yadav
Happy republic day ♥️
ReplyDeleteGazab ka likhe ho bhai🔥🔥
U 2 bhai dhanyawad 🖤
DeleteMind blowing ��
ReplyDeleteThanksss✌️🔥
DeleteBehtreen
ReplyDeleteTy💕
DeleteBahut badhiya♥️ jai hind 🇮🇳
ReplyDeleteThank you ♥️
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