मगर कब तक?

इश्क में आजमाइश, मगर कब तक?
इश्क में झूठ की नुमाइश, मगर कब तक?
इश्क में इंतज़ार, मगर कब तक?
इस कदर खामोशी, मगर कब तक?
तेरा यूं बेवजह मुझसे किनारा कर जाना,
बीच रास्ते में यूं डूबता छोड़ जाना।
तेरा यूं मुझसे झूठी बातें और झूठा वादा करना,
हर रोज बेवजह लड़ाई करना,
थोड़े-थोड़े बात पर पुराने घाव उधेड़ना,
मुझसे दूर होने का हमेशा ख्याल करना,
और एक दिन मुझे पराया कर जाना।
मगर कब तक?


                             By— Pradeep Yadav

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