पढ़ पाओगी?
चलो ठीक है...
मैं बोल भी देता अगर,...
क्या सच में!!
अगर मैं ज़ुबान से कहूं,
तो तुम सब कुछ समझ जाओगी?
जिसने मेरी आंखों में प्यार ना देखा हो आज तक,
क्या बेजुबान शायरियां तुम पढ़ पाओगे?
अरे सर्दियों की धूप की तरह सेहलाया है तुमको,
गर्मियों की आंच तो आना अब भी बाकी है।
जो खूबसूरत पल बिताए तूने मेरे साथ,
अब कांच का चुभना भी तो बाकी है।
अरे तुमने तो मुझे रुला कर देख लिया तमाशा,
पर अब तेरी आंखों में आंसू आना भी बाकी है।
By— Pradeep Yadav
Mast hai bhai
ReplyDeleteBahut bahut dhanyawad mere bhai 🤩💫
DeleteMashallah ♥️
ReplyDeleteSuperb 🔥
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