दिल की बात 🖤

दिल की खामोशी को,
वो समझ ही ना पाई।
केहना कुछ और ही था,
और केह कुछ और ही आए।
दिल की बात लफ्जों से बयां नहीं कर पाए...
और वह हमारी खामोशी को समझ नहीं पाए...
अब सोचा हूं शब्दों से बयां कर दूं...।
यूं तो हम ज्यादा बोलते नहीं...,
राज़ दिल के सबसे खोलते नहीं।
कलम से नहीं दिल से लिखते हैं...,
अपनों से दिमाग से नहीं दिल से बात करते हैं।
माना कि मुमकिन नहीं था तेरा मेरा हो जाना,
पर सुना है मैंने चमत्कार बहुत होते हैं इस दुनिया में।।


                                          By— Pradeep Yadav

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