सँवरने दो~
सानेहे सारे मिरी जान गुजरने दो,
ज़ख्म पुराने हैं इन्हें भरने दो।
ज़ख्म पुराने हैं इन्हें भरने दो।
ज़िंदगी है तुमसे तुममें ढलने दो,
आखों से बाँहों में उतरने दो।
मुझको आज जरा सँवरने दो,
उनपे मैं मरती हूं तो मरने दो।
लम्हों की गुज़ारिश है हम-नशीं,
चलो सिने पे सर रख सोने दो।
साँसों को साँसों में घुलने दो,
धीमे-धीमे धड़कनों को बढ़ने दो।
क्या बोलेंगे सर चढ़ के जहाँ के,
जरा रूह से रूह को मिलने दो।
फिक्र क्यूं है नज़रों के गुजरने की,
शर्मो-हया से मुझको मुकरने दो।
अंधेरे में चुप हैं कुछ ख़्वाब तेरे,
इन ख़्वाबों को ना बहलने दो।
By— Pradeep Yadav
हम-नशीं;
those sitting together, companion, associate
सानेहे;
tragedy
बहलने;
pacify
शांत करना/ शांत रहना
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