मुद्दा

अच्छा लिखा बुरा लिखा,
पर हर वक्त लिखता गया।

कभी सही तो कभी गलत,
मगर सबको दिखता गया।

मैं शराब में पकड़े कलम,
सिर्फ सच लिखता गया।

गैर जिम्मेदाराना बात नहीं,
मुद्दे की बात रखता गया।

हकीकत जानते हैं सब यहां,
पैसे के लिए देश बिकता गया।

अब जो लिखने लगा हूं,
एक दिन बिकने लगूंगा।

देख "प्रदीप" तेरी बात सबको चुभने लगी है,
नशे से भाहर आजा सबको बात समझ आने लगी है।



                         By— Pradeep Yadav


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