कोई तो आए~

कोई तो आए मेरी अयादत को,
इनायत की मुझको जरूरत है।

मैं भीड़ में अकेला हूं,
या पूरी भीड़ ही अकेली है।

कभी जीत के हराती है,
कभी हार के जिताती है।

ये तवक्कों के खेल में,
जिंदगी हमें अक्सर नचाती है।

इक उसकी तबस्सुम मेरा दिन बनती है,
मनाल की साज़िश मेरे मुंसिफ को अपनी तरफ कर जाती है।

                                   By~ Pradeep Yadav

अयादत~ रोगी का हाल पूछना
इनायत~ मेहरबानी/आशीर्वाद
तवक्कों~ उम्मीद/ आशा
तबस्सुम~ मुस्कुराहट
मनाल~ धनी/ संपत्ति
मुंसिफ~ न्याय करने वाला

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