सच
जहां पर बोलना है,
वहां चुप हो जाते हैं।
जहां खामोश रहना है,
वहां सब बक जाते हैं।
अपराध देख सारे बैठ जाते है,
अपनी बारी में चिल्लाते हैं।
अधूरी ज़िन्दगी में सवाल उठाते है,
मौका आने पे तालियां बजाते हैं।
जवान दर्द से कहराते है,
हम-उम्र दिल लगते है।
लाखों फरियादी चिल्लाते हैं,
अंधे कानून वाले सो जाते है।
विचार सबके भ्रष्ट है,
पाखंडी सारे मस्त है।
वे सभी भ्रष्टाचारी आज,
सरकारी नियमों से त्रस्त हैं।
जो घुटने टेक देते है घर में,
वही बाहर निडर और निष्पक्ष है।
By— Pradeep Yadav
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