प्यार में सब धुंधला लगे
रोज गुजरता हूं बीती यादों से,
मेरा दायरा सिमट गया तबसे।
इक प्यार के चक्कर में पड़ गया,
उल्टे पांव चलने लगा तबसे।
रफ्तार तो वहीं रही पर मंजिल नहीं,
घूम फिर के बात फिर आती है वही।
जो तू है नहीं पास धुंधला सब लगे,
मंज़िल की अब मुझको जरूरत न लगे।
By— Pradeep Yadav
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