इतना ही है—

मजबूत भी हूं, मजबूर भी हूं,
हालातों से लड़ रहा अपाहिज भी हूं।

प्यार भी है, नफ़रत भी है,
मारना भी है और जीना भी है।

पाप भी है, पुन्य भी है,
दान करो सिर्फ वरना नर्ख भी है।

नेता भी है, अभिनेता भी है,
असल से ज्यादा झूठ में पैसा भी है।

इंसान भी हूं, हैवान भी हूं,
बेचैन हूं और बाकी नींद भी है।

     
                    By— Pradeep Yadav

Comments

Popular Posts