प्रेम और कालाबाजारी
कुछ सही जो कर लू,
मैं विलोपकारी हूं।इस कालाबाजारी में,
मैं भी भागीदारी हूं।
स्वर्ग की गोद में,
सेना की जगह है।
शख्त हाथों में,
नरमी साथ कहा है।
पैसों कि गर्मी से,
सुख कदमों में है।
मैं नर्क में भी नहीं,
निस्वार्थ भाव जो यहां है।
By— Pradeep Yadav
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