अश्क

अश्क तो मेरे पलकों से भी उतने ही बहे,
तेज़ धूप और चांदनी रात को हम तन्हा रहे।

ऐ खुदा बुरा तो तुझे भी लगा होगा,
तेरी कसम खाते थे टूटते दुखा तो होगा।

सबका बुरा-भला तेरे हाथ में है,
सबको कैसे बतलाऊं तू मेरा ना हुआ।

जर्रे-जर्रे पे अगर तू रहता है तो मैं खुद को क्यों न पुजू,
तेरे दे के छीन लेने से अच्छा है मैं खुद का ही सजदा करू।



                         By— Pradeep Yadav

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