रब्त रब से( connection/bond with god) ~

बहाने भी है और बुलाती भी है,
रोज देख कर मुस्कुराती भी है।
यूं तो चाहते भी हैं और मनाते भी हैं,
लगातार मुझसे तेरी आंखें टकराती भी हैं।
सुना है रब्त है उस रब से तेरा,
फ़िर भी ख़राब-हालो में मिलने को बुलाती भी है।
इक लफ्ज़-ए-मोहब्बत का फसाना है ये,
इस मासूम दिल के हुए तो ठीक वरना जाने का सारा जमाना ये।


              By— Pradeep Yadav

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