कलयुग
क्या करोगी मेरी हो के,
मै तो खुद का ना रहा।
तुमको लगता है मै झूठ बोल रहा,
तो आ के देख, मै मर के भी जी रहा।
अपने अंदर के साये से भी अंजान हूं मै,
आदत से मजबुर इंसान हूं मै।
उस खुदा ने तो सुधरने के कई मौके दिए,
लेकिन अपने गुनाहो का अंजान हूं मै।
इस कलयुग में बदनाम हैवान हूं मै,
जानवरों के बीच में नया नाम हूं मै।
अपनी कल की गलतियों पे आज हैरान हूं मै,
आखिर कलयुग का इंसान हूं मै।
By— Pradeep Yadav
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