मुद्दा

सबको अपने हित की बात करनी थी,
मै तो पागल था जो मुद्दा लेकर बैठ गया।
तुम्हारी यादों में मकबरा या महल क्या बनाऊं,
उसके बदले में, मै अपने शहर में अनगिनत पेड़ लगाऊं।
दीवारों से भी तो बातें की जा सकती हैं,
मैं तुम में क्यों अपना समय खपाऊं।
गले लगाकर दिल को ठंडक मिलती थी,
उसके बदले में, मै चार दीवार बनाऊं।



                    By— Pradeep Yadav

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