धुआं
आज करने को कई वफ़ा है,
धुआं चूना क्योंकि इसी में मज़ा है।
कहने को फरमाइशों का समां है,
नामुमकिन-सा हमारे ख्वाहिशों का धुआं है।
कहने को तो जन्मदिन है मेरा,
पर एक दिन के दिखावे का हवा है।
घर से काम और काम से घर,
क्या धुआं बन उड़ने का बस फ़ैसला किया है।
By— Pradeep Yadav
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