दिखावटी~
मिले बिन वो मुझसे खफा सोचती है,
मैं वक्त खोजता हूं और वो दूसरा खोजती है।
वो अपने को कितना हसीन सोचती है,
स्कूल में अंक ला के खुद को ज़हीन समझती है।
दस्तक तो खुदा अपने पैरों पे खड़ा होते वक्त देता हैं,
राजनीतिक और अभिलाषा में जब बंदिशें प्रकट होती हैं।
यहां कोई अपनी बात पे अमल नहीं रहता है,
अदाओं में इशारा देख अच्छा इंसान भी फिसलता है।
By— Pradeep Yadav
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