ख़्वाब

किसने कहा कहीं धूप है तो कहीं अंधेरा,
किसने कहा कहीं गम है तो कहीं खुशी है सबका हिस्सा।

उसकी बातें दिन रात कई बार करता हूं,
ख्वाब में कई बार ये बात सबसे कहता हूं।

मैंने देखा है ख्वाब जिसमे मैं बेघर हूं,
मैं भागा सबसे तेज़ ये ख़वाब है अभी दूर।

तुमने तो ठुकरा दिया पर कभी कमी लगे तो आ जाना,
इक ख्वाब से डर गया था पर तुमने ही तो उसको झूठा बताया था।

रख बीती यादें मैंने कुछ कविताएं लिख दी,
मैने ख़्वाब में देख अपनी चीज़ और जल्दी खो दी।


                              By— Pradeep Yadav

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