कैद हूं
कैद कैसे न राहूं तेज बवंडर है तेरा,
सांस कब से दबी है मेरी।
ये हादसा भी बड़ा शर्मनाक है यार,
थोड़ा झूठ अपने को और थोड़ा झूठ तेरे लिए कहा।
एक रूह रो रही है खुशियों के तले,
खुशहाल ज़िंदगी चल रही औरों के लिए।
सपने सजा के यूं ही चल दिए,
और दिल लगा के यूं ही तोड़ दिए।
खूब हंसता रहा रब मेरे रब्त पे,
मैंने भी अब रिश्ते जोड़ने छोड़ दिए।
By— Pradeep Yadav
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